थार की धरती से उठी यह आवाज दूर तक जाएगी, नफरत के खिलाफ, संविधान के साथ और भाईचारे के पक्ष में- हरीश चौधरी।
बाड़मेर, 17 अगस्त। संविधान, सामाजिक सद्भाव, समानता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ सेड़वा से गागरिया तक निकाली जा रही करीब 100 किलोमीटर लंबी संविधान सद्भावना पदयात्रा के तीसरे दिन रविवार को यात्रा के देदूसर से शिव विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश के दौरान थार की अपनी अपनायत, भाईचारे और सद्भाव की तस्वीर देखने को मिली।

इस दौरान बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा और संविधान की प्रतियां लेकर पदयात्रा में शामिल हुए। भारत माता की जय, वंदे मातरम् और संविधान-सद्भावना के नारों से शिव क्षेत्र गूंज उठा। रास्ते में ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने भी पदयात्रियों का स्वागत किया।
अमीन खान के पदयात्रा में शामिल होने को थार की सामाजिक एकता और भाईचारे की मजबूत परंपरा से जोड़कर देखा गया। सीमावर्ती क्षेत्र में लंबे समय से सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास की मिसाल कायम रही है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए संविधान सद्भावना पदयात्रा के माध्यम से संविधान के मूल्यों के साथ समाज में भाईचारा और सद्भाव मजबूत करने का संदेश दिया जा रहा है। पदयात्रा में शामिल मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि यह केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का सफर नहीं है, बल्कि संविधान की रक्षा, सामाजिक सद्भाव, समानता और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प है। थार की सरहदी धरती से उठ रही यह आवाज नफरत और विभाजन के खिलाफ तथा संविधान और सामाजिक एकता के पक्ष में है।
थार की धरती से सद्भाव का संदेश- चौधरी

पदयात्रा में मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी, सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा, पूर्व राज्य मंत्री गफूर अहमद, पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेंद्र कड़वासरा, पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान, निवर्तमान जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी व महिला कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव शम्मा बानो, पंकज प्रताप सिंह, मुकन सिंह राजपुरोहित, सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, युवा, महिलाएं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल रहे।
पदयात्रा के दौरान हरीश चौधरी ने कहा कि सीमावर्ती बाड़मेर की सबसे बड़ी ताकत यहां का भाईचारा, आपसी विश्वास और सामाजिक सद्भाव है। कठिन परिस्थितियों में रहने वाले यहां के लोगों ने हमेशा एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होकर सामाजिक एकता की मिसाल कायम की है।
उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे जैसे मूल्यों की रक्षा करना भी सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि संविधान सद्भावना पदयात्रा किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है। यह यात्रा संविधान के पक्ष में है और ऐसे भारत के लिए है, जहां हर नागरिक को समान अधिकार मिले, हर आस्था का सम्मान हो और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो।
