BCCI का ‘मिशन 2026’: क्या खत्म होगा सुपरस्टार कल्चर? कोहली-रोहित के ग्रेड पर गिरेगी गाज

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी कर रहा है। यह बदलाव न केवल खिलाड़ियों की कमाई को प्रभावित करेगा, बल्कि भारतीय क्रिकेट से ‘सुपरस्टार कल्चर’ को धीरे-धीरे खत्म कर ‘फॉर्मेट प्रायोरिटी’ (Format Priority) के नए युग की शुरुआत करेगा। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, चयन समिति ने मौजूदा A+ ग्रेड को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव दिया है।
तीनों फॉर्मेट खेलने वालों की होगी ‘चांदी’
बीसीसीआई का नया मॉडल अब ‘नाम’ के बजाय ‘काम’ और ‘उपलब्धता’ पर केंद्रित होगा। इस नए ढांचे में केवल तीन श्रेणियां—A, B और C रखने का सुझाव दिया गया है। बोर्ड का स्पष्ट संदेश है कि जो खिलाड़ी साल के बारहों महीने तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी-20) के लिए उपलब्ध रहेंगे, वही सर्वोच्च सैलरी के हकदार होंगे।
वर्तमान में रोहित शर्मा और विराट कोहली A+ ग्रेड का हिस्सा हैं और सालाना 7 करोड़ रुपये लेते हैं। चूंकि दोनों दिग्गज टी-20 और टेस्ट से संन्यास ले चुके हैं और अब केवल वनडे फॉर्मेट में नजर आते हैं, इसलिए उन्हें नए नियमों के तहत सीधे ग्रेड B (3 करोड़ रुपये) में धकेला जा सकता है। यह कदम यह साफ करता है कि बीसीसीआई अब भविष्य की ओर देख रहा है और युवा प्रतिभाओं को तीनों फॉर्मेट खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।

धोनी जैसा ‘एग्जिट प्लान’ और युवाओं का उदय
यह पहली बार नहीं है जब किसी दिग्गज को सीमित भागीदारी के कारण नीचे भेजा गया हो। 2019 में एमएस धोनी के साथ भी यही हुआ था। टेस्ट छोड़ने के बाद उन्हें टॉप ग्रेड से बाहर किया गया और अंततः संन्यास के बाद वह सूची से ही हट गए। अब यही स्थिति कोहली और रोहित के सामने खड़ी है।
वहीं, दूसरी ओर ऋषभ पंत, शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों के लिए यह एक बड़े अवसर की तरह है। अगर ये खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में निरंतरता बनाए रखते हैं, तो वे भविष्य के ‘ग्रेड A’ के असली हकदार होंगे। 2024-25 की सूची में बुमराह और जडेजा जैसे नाम भी A+ में थे, लेकिन नए नियमों में बुमराह जैसे ‘ऑल-फॉर्मेट’ खिलाड़ियों को ही सर्वोच्च वित्तीय सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
महिला क्रिकेट में समानता की चुनौती

एक तरफ पुरुषों के करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट में फेरबदल हो रहा है, वहीं बीसीसीआई के महिला सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में अभी भी बड़ा वित्तीय अंतर बना हुआ है। महिला क्रिकेट में केवल तीन ग्रेड (A, B, C) हैं, जहां टॉप ग्रेड (हरमनप्रीत, स्मृति मंधाना) को केवल 50 लाख रुपये मिलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुष कॉन्ट्रैक्ट में हो रहे इन बदलावों के साथ-साथ महिला क्रिकेटरों की सैलरी में भी इजाफे की मांग आने वाले समय में जोर पकड़ सकती है।
फैसला अब एपेक्स काउंसिल के हाथ में
ग्रेडिंग का यह नया ब्लूप्रिंट तैयार है, लेकिन इस पर अंतिम मुहर अगली एपेक्स काउंसिल मीटिंग में लगेगी। यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो भारतीय क्रिकेट की वित्तीय संरचना पूरी तरह बदल जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीसीसीआई अपने सबसे बड़े ब्रांड्स (कोहली-रोहित) की सैलरी में कटौती करने का कड़ा फैसला ले पाता है या नहीं।
