
बाड़मेर में एक बार फिर लोकतंत्र और जनता के अधिकारों को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया। कांग्रेस पार्टी के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक मेवाराम जैन के नेतृत्व में जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर तीन बेहद अहम जनहितकारी ज्ञापन सौंपे। कांग्रेस ने साफ कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि गरीब, ग्रामीण, मजदूर, किसान और आम मतदाता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।

सबसे पहले ज्ञापन में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र में सुनियोजित साजिश के तहत हजारों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि डबल और अपात्र नाम अब भी बने हुए हैं। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए गरीब, पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग को वोट के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच और सभी वास्तविक मतदाताओं के नाम तत्काल पुनः जोड़ने की मांग की।

दूसरे ज्ञापन में नरेगा योजना के नाम से छेड़छाड़ पर तीखा विरोध दर्ज कराया गया। कांग्रेस ने कहा कि नरेगा ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा है और इसका नाम बदलना महात्मा गांधी के विचारों व संविधान की आत्मा का अपमान है।
तीसरे ज्ञापन में नगर परिषद बाड़मेर में वार्ड पुनर्गठन को लेकर हाईकोर्ट जोधपुर के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया गया। कांग्रेस ने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर वार्ड सीमाओं में बदलाव लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने दो टूक कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर संघर्ष जारी रखेगी।
