बाड़मेर। जन्म-मृत्यु पंजीयन के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीयन घटना के दो वर्ष के भीतर नहीं कराया जाता है, तो अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से अनुमति (अनुज्ञा) मिलने के बाद ही पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।
जिला रजिस्ट्रार डॉ. के. बी. खंडेलवाल ने बताया कि सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत 1 अक्टूबर से धारा 13(3) के प्रावधानों में संशोधन (New rules for birth and death registration) किया गया है।
- 1 से 2 वर्ष के भीतर: यदि किसी जन्म-मृत्यु Birth and death registration की सूचना घटना के 1 वर्ष के बाद लेकिन 2 वर्ष के भीतर दी जाती है, तो संबंधित क्षेत्राधिकार के उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट घटना की सत्यता की जांच करने के बाद अनुज्ञा जारी करेंगे।
- 2 वर्ष के बाद: यदि घटना के 2 वर्ष बीत जाने के बाद रजिस्ट्रार को सूचना दी जाती है, तो संबंधित क्षेत्र के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) द्वारा मामले की जांच के पश्चात ही अनुज्ञा जारी की जाएगी।
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इधर, जिला कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार चिन्मयी गोपाल ने जिले के समस्त उपखंड अधिकारियों और तहसीलदारों को ‘जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम’ का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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