सनातन धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व माना जाता है और इस महीने पड़ने वाले सभी पर्व और त्योहार का महत्व अधिक होता है. क्योंकि इसी पावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को माता सरस्वती प्रकट हुई थी. ऐसी स्थिति में इस दिन को बसंत पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार बसंत पंचमी को लेकर कई तरह के कन्फ्यूजन भी बने हैं, तो चलिए आज हम आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि आखिर कब है बसंत पंचमी? क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि? तो चलिए जानते हैं.
दरअसल हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार 23 जनवरी पूर्वाह 2:28 से शुरू होकर अगले दिन 24 जनवरी रात्रि 1:46 पर समाप्त होगा. लेकिन सनातन धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है. ऐसी स्थिति में 23 जनवरी को ही बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा. जिसमें माता सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त प्रात काल 6:43 से लेकर दोपहर 12:15 तक रहेगा.
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने दो बार पंचमी तिथि पड़ती है. जिसमें एक कृष्ण पक्ष की तो दूसरा शुक्ल पक्ष की. लेकिन माघ महीने की पंचमी तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. क्योंकि इसी दिन ज्ञान बुद्धि और विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती का प्रक्यट हुआ था. विद्यालय में इस दिन धूमधाम के साथ प्रकट उत्सव मनाया जाता है. दूसरी तरफ विद्यार्थी भी माता सरस्वती की तरह-तरह से पूजा आराधना करके प्रसन्न भी करते हैं. इस वर्ष माघ माह की पंचमी तिथि 23 जनवरी शुभ दिन शुक्रवार को पढ़ रही है
इस दिन प्रात काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. श्वेत और पीले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए. माता भगवती की आशीर्वाद मुद्रा वाली चित्र अथवा महा सरस्वती के यंत्र को एक श्वेत वस्त्र पर रख कर विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करनी चाहिए. पीले रंग का पुष्प अर्पित करना चाहिए. उसके बाद माता लक्ष्मी के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए. बसंत पंचमी के दिन ऐसा करने से माता रानी की विशेष कृपा बनी रहती है.
