बाड़मेर जिले की पुलिस व्यवस्था उस वक्त कठघरे में आ गई, जब धनाऊ थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने हर किसी को चौंका दिया। 2018 में मौत के आगोश में जा चुकी महिला के खिलाफ वर्ष 2026 में मारपीट, घर में घुसपैठ और जाति सूचक गालियों का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कर ली गई। मामला उजागर होते ही जिलेभर में हड़कंप मच गया है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
पूरा मामला चौहटन उपखंड क्षेत्र के धनाऊ पुलिस थाने से जुड़ा है। परिवादी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दीनगढ़ निवासी मूलाराम, केसराराम, हेमाराम, भीखाराम, भिखी देवी, लाछी देवी, धर्माराम, रूपा देवी, दुदाराम और दुदाराम की पत्नी दौली सहित 10-15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोप है कि इन लोगों ने कब्जे की नीयत से परिवादी के प्लॉट में घुसकर तोड़फोड़ की, बीच-बचाव करने पर जाति सूचक शब्दों से अपमानित किया और विरोध करने पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में परिवार के कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए बताए गए हैं। घटना 1 जनवरी की देर रात की बताई जा रही है।
लेकिन सबसे चौंकाने वाला और सनसनीखेज पहलू यह है कि FIR में जिस महिला का नाम आरोपी के तौर पर दर्ज है, उसकी मौत साल 2018 में ही हो चुकी है। अब सवाल यह उठता है कि जो महिला आठ साल पहले दुनिया छोड़ चुकी, वह 2026 में कैसे किसी के प्लॉट में घुसकर मारपीट कर सकती है?
यह मामला सामने आते ही बाड़मेर पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही है। FIR दर्ज करते समय न तो बुनियादी सत्यापन किया गया और न ही आरोपियों की जानकारी की गंभीरता से जांच की गई। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या बिना जांच-पड़ताल के ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं?
फिलहाल धनाऊ पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। लेकिन यह “जांच” अब खुद पुलिस के लिए ही सवाल बन चुकी है। एक मृत महिला को आरोपी बना देना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली पर करारा तमाचा माना जा रहा है।
अब देखना यह है कि इस सनसनीखेज चूक की जिम्मेदारी कौन लेता है और दोषियों पर कब कार्रवाई होती है।

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