
तेल, गैस और खनन जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की मांग
बाड़मेर ईरान में चल रहे संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितता के बीच वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने तेल, गैस और खनन जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की मांग करते हुए कहा है कि आज की दुनिया में कोई भी देश किसी का स्थायी मित्र या साझेदार नहीं होता। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में भारत के लिए आत्मनिर्भरता अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आर्थिक और रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है।अनिल अग्रवाल ने कहा कि संसाधनों से भरपूर क्षेत्रों में किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ता है, क्योंकि देश आज भी तेल, गैस और खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे देश की परिवहन व्यवस्था चलती है। घरेलू रसोई गैस का करीब 66 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आता है और लगभग 50 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस का आयात किया जाता है, जिसका उपयोग स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन में होता है।उन्होंने कहा कि तेल और गैस देश के कुल आयात व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, जो हर साल करीब 176 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाता है। उनके अनुसार तेल, गैस और सोना मिलकर भारत के कुल आयात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। अनिल अग्रवाल के मुताबिक जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे सरकारी खर्च और कर्ज़ बढ़ते हैं, रुपया कमजोर होता है और महंगाई बढ़ती है, जिसका बोझ अंततः आम लोगों पर आता है।वेदांता चेयरमैन ने सरकार से अपील की कि तेल, गैस और खनन जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना और अनुमतियों में देरी को कम करना ज़रूरी है। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए देश को सोच-समझकर जोखिम लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि जन-सुनवाई और पर्यावरण से जुड़ी स्वीकृतियों की प्रक्रिया में लचीलापन लाया जाना चाहिए। भरोसे पर आधारित व्यवस्था अपनाई जा सकती है, जिसमें कंपनियां नियमों के पालन का आश्वासन दें और बाद में जांच के ज़रिये उसकी पुष्टि की जाए।अनिल अग्रवाल ने कहा कि देश में मौजूद मौजूदा परिसंपत्तियों, जिनमें से अधिकांश सरकार के स्वामित्व में हैं, का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। इनमें से कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी अनुभवी निजी कंपनियों को दी जा सकती है। साथ ही कर्मचारियों को हिस्सेदारी देकर उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के विस्तार से बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। आज बड़ी संख्या में महिलाएं इस क्षेत्र में आगे आ रही हैं और यदि अनुकूल माहौल बने, तो विदेशों में कार्यरत प्रतिभाशाली भारतीयों की भी देश वापसी हो सकती है।अपने बयान के अंत में अनिल अग्रवाल ने दोहराया कि दुनिया पहले से कहीं अधिक अस्थिर और अनिश्चित हो चुकी है। मौजूदा वैश्विक राजनीति में कोई भी देश स्थायी मित्र नहीं होता और संकट के समय हर देश अपने हितों को प्राथमिकता देता है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा और खनिज ज़रूरतों के लिए खुद पर निर्भर होना ही होगा।अग्रवाल के इस बयान से राजस्थान के बाड़मेर तेल क्षेत्र को लेकर भी बड़ी उम्मीदें जगी हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में घरेलू तेल उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है और आत्मनिर्भरता को रणनीतिक आवश्यकता बताया जा रहा है।गौरतलब है कि वेदांता समूह की कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस पिछले दो दशकों से राजस्थान के बाड़मेर में भारत के सबसे बड़े थल-आधारित तेल क्षेत्र से कच्चे तेल का उत्पादन कर रही है। बाड़मेर क्षेत्र में मंगला, ऐश्वर्या और भाग्यम सहित कई तेल क्षेत्रों से उत्पादन हो रहा है, जो देश की कच्चे तेल की ज़रूरतों में अहम योगदान देता है।अनिल अग्रवाल हाल के बयानों में बाड़मेर को लेकर बड़े निवेश की योजना का संकेत भी दे चुके हैं। वेदांता समूह इस क्षेत्र में लगभग 5 अरब डॉलर का निवेश कर तेल उत्पादन को बढ़ाकर 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जाना चाहता है। इस योजना के तहत 500 से 600 नए कुओं की खुदाई, करीब 20 रिग्स का उपयोग और पुराने क्षेत्रों के विस्तार के ज़रिये लगभग 5 अरब बैरल तेल समतुल्य भंडार जोड़ने की तैयारी है।इसके अलावा, राजस्थान में कुल निवेश योजना के तहत केयर्न ऑयल एंड गैस के लिए करीब 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश का भी प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य उत्पादन को बढ़ाकर लगभग 3 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जाना है। माना जा रहा है कि अगर ये योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं, तो इससे न सिर्फ भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि राजस्थान में रोज़गार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि अनिल अग्रवाल की ओर से तेल, गैस और खनन क्षेत्रों को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की मांग और बाड़मेर में बड़े निवेश की योजना—दोनों मिलकर भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हो सकती हैं।

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